युद्ध के समय एक्सप्रेसवे-हाइवे पर इसलिए उतारे जाते हैं फाइटर प्लेन


नई दिल्ली.22 मई 2015 की सुबह इंडियन एयर फोर्स (Indian Air Force) ने फाइटर प्लेन (Fighter Plane) मिराज-2000 की यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway) पर लैडिंग कराई थी. बेशक एक्सप्रेसवे पर यह पहला मौका था, लेकिन एयर फोर्स ने जता दिया कि हमारे पायलट (Pilot) किसी से कमतर नहीं हैं. वो इतने काबिल हैं कि रनवे (Runway) के साथ ही सड़क पर भी आपात के हालात में प्लेन को उतार सकते हैं. उसके बाद तो आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे (Agra-Lucknow Expressway) पर भारी भरकम हरक्यूलिस विमान और फाइटर प्लेन सुखोई (Sukhoi) की लैंडिंग को सभी ने लाइव देखा था.

लेकिन, अब सवाल उठता है कि बड़े-बड़े एयर फोर्स स्टेशन होने के बाद भी हाइवे और एक्सप्रेसवे पर लैंडिंग कराने की जरूरत क्यों पड़ती है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए न्यूज18 हिन्दी ने बात की रिटायर्ड एयर फोर्स अफसर विंग कमांडर एके सिंह से.

एयर अटैक कमजोर करने को हवाई पट्टी पर होता है हमला

विंग कमांडर रिटायर्ड अनूप चौहान बताते हैं कि जब दुश्मन हमला करता है तो उसका पहला निशाना एयर फोर्स स्टेशन होते हैं. दुश्मन चाहता है कि वो हमारी हवाई पट्टियों को बम और मिसाइल से उड़ा दे. एयर फोर्स स्टेशन पर खड़े फाइटर एयर क्राफ्ट को उड़ा दे. जिससे कि हमारे फाइटर उड़ान न भर पाएं और हमारा एयर अटैक कमजोर हो जाए. हवाई पट्टी खराब होने के बाद हमारे ट्रांसपोर्ट प्लेन भी न उड़ पाएं और हम अपनी थल सेना को किसी भी तरह की मदद न पहुंचा पाएं.
इस तरह काम आते हें एक्सप्रेसवे

अनूप चौहान बताते हैं कि जब इस तरह का कोई हमला होता है तो हम अपने प्लेन को सुराक्षित करने के लिए उन्हें एक्सप्रेसवे पर बनी रनवे पर पहुंचा देते हैं. उसके बाद उसी रोड रनवे से दुश्मन पर हवाई हमला करने के लिए फाइटर प्लेन को ईंधन और हथियार दिए जाते हैं. वहीं, ट्रांसपोर्ट प्लेन रसद, हथियार और सैनिकों को लेकर रोड रनवे से ही उड़ान भरता है.


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